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परम उपकारी परम पूज्य आचार्य प्रवर श्रीमद् विजय
पद्म प्रभु सूरीश्वर जी महाराज सा. ने जैन शासक की प्रभावना अनिवृध्दि
में अपने समस्त जीवन को अरिहंत प्रभु के चरणों में सौंप दिया है, आपके
आशीवाद एवं सदुपदेश ने जैन एवं जैनेत्तर के प्रत्येक श्रेणी के
महानुभावों के जीवन को एक प्रषस्त मार्गदर्षन प्रदान किया है। जाति
पांति के भेदभावों से रहित निर्बल एवं सक्षम प्रत्येक जीवन को अहिंसा व
परोपकार के मार्ग से जोड़ा है। अपनी और ध्यान आकर्र्षित करता है, आपके
दयावान सुकोमल ह्दय ने प्रत्येक जीव को क्षमा का अनूठा संदेश दिया है।
एक बार जो उनके दर्षन मात्र कर लेता है, उसे यह प्रतीत होता है मानों
यह उसका अंतिम भव हो |
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